भीम कविता
कोशिश कर, हल निकलेगा,
आज नही तो, कल निकलेगा...
आज नही तो, कल निकलेगा...
भीम की तरह प्रतिज्ञा तो कर,
मरूस्थल से भी जल निकलेगा..
मरूस्थल से भी जल निकलेगा..
मेहनत कर, पौधो को पानी दे,
बंजर जमीन से भी फल निकलेगा...
बंजर जमीन से भी फल निकलेगा...
ताकत जुटा, हिम्मत को आग दे,
फौलाद का भी बल निकलेगा...
फौलाद का भी बल निकलेगा...
जिन्दा रख, दिल में उम्मीदों को,
समन्दर से भी अमृत निकलेगा...
समन्दर से भी अमृत निकलेगा...
कोशिशें जारी रख कुछ कर गुजरने की,
जो है आज थमा थमा सा, कल चल निकलेगा ।
जो है आज थमा थमा सा, कल चल निकलेगा ।
Author : Unknown
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