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सन - 1939 बाबासाहब  डो. भीमराव अम्बेडकरका अस्प्रुस्य समाज के अधिवेशन मे भाषण, चेम्बूर (मुंबई)

|| तथागत बुद्ध के अभिन्न विचार ||

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चार आर्य सत्य 1. दुनिया में दुःख है। 2. दुखों की कोई-न-कोई वजह है। 3. दुखों का निवारण मुमकिन है। 4. दुःख निवारण का मार्ग है । - दुखों की मूल वजह अज्ञान है। अज्ञान के कारण ही इंसान मोह-माया और तृष्णा में फंसा रहता है। - अज्ञान से छुटकारा पाने के लिए अष्टांग मार्ग का पालन है : 1. सही समझ, 2. सही विचार, 3. सही वाणी, 4. सही कार्य, 5. सही आजीविका, 6. सही प्रयास, 7. सही सजगता और 8. सही एकाग्रता। - साधना के जरिए सर्वोच्च सिद्ध अवस्था को पाया जा सकता है। यही अवस्था बुद्ध कहलाती है और इसे कोई भी पा सकता है। - इस ब्रह्मांड को चलानेवाला कोई नहीं है और न ही कोई बनानेवाला है। - न तो ईश्वर है और न ही आत्मा। जिसे लोग आत्मा समझते हैं, वह चेतना का प्रवाह है। यह प्रवाह कभी भी रुक सकता है। - भगवान और भाग्यवाद कोरी कल्पना है, जो हमें जिंदगी की सचाई और असलियत से अलग कर दूसरे पर निर्भर बनाती है। - पांचों इंद्रियों की मदद से जो ज्ञान मिलता है, उसे आत्मा मान लिया जाता है। असल में बुद्धि ही जानती है कि क्या है और क्या नहीं। बुद्धि का होना ही सत्य है। बुद्धि से ही यह समस्त संसार प्रकाशवा...